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Saturday, 1 March 2008

मेरी अधूरी दास्ताँ

यह दास्ताँ भी अब अधूरी रहेगी,
तेरे मेरे बीच में अब दूरी रहेगी,
बहुत रोई हूँ तुझे याद करके,
अब यह आंखें ना गीली रहेंगी.

ना शिकवा करेंगे किसी से अब,
ना दर्द अपना दिखायेंगे,
तेरे दिए दर्द के साथ ही ,
अब हम मुस्कुराएंगे.

तू कर ले लाख कोशिश,
पर अब ना टूटेंगे हम ,
खुशियों से सजाई है महफिल,
अब दूर भाग जायेंगे घाम.


तेरी ज़रूरत नही अब मुझे,
तेरी याद ही काफी है,
मेरी सोती हुई रातों के लिए,
तेरा एहसास ही काफ़ी है.

जा दूर जा मुझसे,
फिर ना वापस आना कभी,
आना तोह ऐसे की,
दूर ना जाना कभी.

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